यह दुनिया बड़ी ज़ालिम है । यह किसी की नहीं होती और सबको अपना बना लेती है। सब यहां इस ज़ालिम दुनिया के गुलाम बन चुके है। इंसान जितने सबक यहां ज़िन्दगी से सीखता है उतने किसी किताब में भी नहीं मिलते। यहां लोग ना किसी का ग़म बांट सकते है ना किसी को खुश देख सकते है। यहां दोस्त दोस्त का नहीं है और प्यार प्यार का नहीं है। इस दुनिया में अगर कुछ तय है तो वो है बदलाव। यहां इंसान भी बदल जाते है और हालात भी। यहां बदलाव के अलावा कुछ तय नहीं है ना किसी का साथ, ना किसी की बात और ना दिन के बाद आने वाली रात। ऐसी ज़िन्दगी से तो मौत ही अच्छी, निभाती यारी बिल्कुल सच्ची यहां जीयें कैसे है कईं झोल, बोलें ना सीधा बातें घुमाते है गोल दिल रहता यहां बिल्कुल अकेला, भले दिखे यहां लोगों का मेला। इंसान यहां ना घर का है ना बाहर का हुआ, जैसे धोबी का कुत्ता ना घाट का हुआ। देता है यहां हर कोई ज्ञान, बोले जैसे खुद ही भगवान यह दीवारों पे टंगी तस्वीरें पुरानी, चाहते नहीं यह यादें दोहरानी ग़म बेचें यहां देके गुलाब, सबने पहना यहां चेहरे पे नक़ाब। चेहरा दिखता है एक पर होते हैं दो। देख दूसरे को खुश यहां लोग देते है रो। ज़ालिम...
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